25 रोचक तथ्य : रिच डैड पुअर डैड

By | 15th November 2019
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रॉबर्ट टी. कियोसाकी रिच डैड पुअर डैड के लेखक कहते हैं, “अमीर लोग अपने बच्चों को ऐसा क्या सिखाते हैं, जो ग़रीब और मध्यम वर्ग के माता पिता नहीं सिखाते!”

आपने रॉबर्ट टी. कियोसाकी का नाम तो सुना ही होगा. नहीं ! तो फिर आपने उनकी लिखी किताब “रिच डैड पुअर डैड” का नाम भी शायद ना सुना हो. चलिए कोई बात नहीं मैं इस किताब के बारे में इसलिए ज़िक्र कर रहा हूँ, क्यूँकी यह किताब अपने आप में बेजोड़ है. आपको जब ये किताब मिले तो ज़रूर पढ़ें. यहाँ मैं इस किताब के 25 रोचक तथ्यों को लिख रहा हूँ. शायद फिर आपको इस किताब को पढने का मन करे. तो पेशा हैं 25 रोचक तथ्य : रिच डैड पुअर डैड.

1.

एक डैडी को यह कहने कि आदत थी मैं इसे नहीं ख़रीद सकता. दूसरे डैडी इन शब्दों के इस्तेमाल से चिढ़ते थे. वे जोर देकर कहा करते थे कि मुझे इसके बजाय यह कहना चाहिए मैं इसे कैसे ख़रीद सकता हूँ. पहला वाक्य नकारात्मक है और दूसरा प्रश्नवाचक. एक में बात ख़त्म हो जाती है और दूसरे में आप सोचने के लिए मजबूर हो जाते हैं.

जब हम ये कहते हैं कि मैं इसे नहीं ख़रीद सकता तो हमारा दिमाग काम करना बंद कर देता है. इसके बजाय जब हम ये पूछते हैं मैं इसे कैसे ख़रीद सकता हूँ तब हमारा दिमाग काम करना शुरू कर देता है.

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2.

दरअसल लोग अपने विचारों से ही अपने जीवन को दिशा देते हैं. ग़रीब डैडी हमेशा कहा करते थे मैं कभी अमीर नहीं बन पाऊँगा और उनकी ये भविष्यवाणी सही साबित हुई. दूसरी तरफ अमीर डैडी हमेशा खुद को अमीर समझते थे. वे इस तरह कि बातें करते थे, मैं अमीर हूँ और अमीर लोग ऐसा नहीं करते.

एक बड़े आर्थिक झटके के बाद जब वे दिवालियेपन कि कगार पर थे तब भी वे खुद को अमीर आदमी ही कहते थे. वे कहते थे ग़रीब होने और पैसा ना होने में फ़र्क होता है. पैसा पास में ना होना अस्थायी होता है जबकि ग़रीब स्थायी होता है. ग़रीब डैडी इसलिए ग़रीब नहीं थे, क्यूँकी वो कम कमाते थे, बल्कि वो इसलिए ग़रीब थे, क्यूँकी उनके विचार और काम गरीबों वाले थे.

3.

पैसा एक तरह कि ताक़त है परन्तु इससे भी बड़ी ताक़त है वित्तीय शिक्षा. पासा तो आता और जाता रहता है परन्तु यदि आप ये जानते हैं कि पैसा किस तरह से काम करता है तो आप ज़्यादा ताक़तवर हो जाते हैं. और आप दौलत कमाना शुरू कर सकते हैं. स्कूलों में ये नहीं सिखाया जाता है कि पैसा किस तरह से काम करता है इसलिए ज़्यादातर लोग पैसे के लिए काम करने में अपनी साड़ी ज़िन्दगी बर्बाद कर देते हैं.

4.

तुम ग़रीब तभी कहलाओगे जब तुम लोग हार मान लोगे. सबसे महत्वपूर्ण चीज़ ये है कि तुमने कुछ किया. ज़ाय्दातर लोग केवल अमीर बनने के बारे में बातें करते रहते हैं और उसके सपने देखते रहते हैं.

तुमने कुछ किया है. मुझे तुम पर गर्व है. मैं फिर से यही कहूँगा आगे बड़े चलो हार मत मानो.

5.

अगर तुमे में तत्काल फैसला लेने कि क्षमता नहीं है तो तुम कभी भी पैसा बनाना नहीं सीख पाओगे. मौके आते हैं और चले जाते हैं इसलिए तत्काल फैसला लेने कि क्षमता एक महत्वपूर्ण कला है.
यहाँ तक पढ़कर आपको अंदाज़ा लग लग गया होगा कि यह रिच डैड पुअर डैड किताब कितने काम की किताब है.

6.

अगर तुम ज़िन्दगी के सबक़ सीखते हो तो इससे तुम्हे बहुत फायदा होगा. अगर तुम ऐसा नहीं करते हो तो ज़िन्दगी तुम्हे लगातार धक्के देती रहेगी. लोग दो चीज़ें करते हैं कुछ लोग ज़िन्दगी के धक्के को सहन करते चले जाते हैं बाकी लोग गुस्सा हो जाते हैं और ज़िन्दगी को धक्का दे देते हैं.

लेकिन वे धक्का देते हैं अपने बॉस को, अपने काम को, अपनी पत्नी या अपने पति को. वे ये नहीं जानते कि ज़िन्दगी उन्हें धक्का दे रही है. ज़िन्दगी हम सबको धक्के देती है कुछ लोग हार मान लेते हैं बाकी के लोग लड़ते हैं.

कुछ लोग सबक़ सीख लेते हैं और आगे बढ़ जाते हैं. ऐसे लोग ज़िन्दगी के धक्कों का स्वागत करते हैं. इन गिने चुने लोगों के लिए धक्को का मतलब ये होता है कि उन्हें कुछ नया सीखने कि ज़रुरत हैं. वे सीखते हैं और खुद को आगे बढ़ा लेते हैं.

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7.

ज़्यादातर करमचारियों को पूरी तनख्वाह कभी नहीं मिलती. सरकार हमेशा अपना हिस्सा TAX के रूप में पहले ही ले लेती है.

जब आप कमाते हैं तो आप पर टैक्स लगता है. जब आप खर्च करते हैं तो आप पर टैक्स लगता है. जब आप बचाते हैं तो आप पर टैक्स लगता है. और फाइनली जब आप मर जाते हैं तो भी आप पर टैक्स लगता है.

लेकिन अमीर लोग सरकार को ऐसा नहीं करने देते. सिर्फ ग़रीब और माध्यम वर्गीय लोग ही सरकार को ऐसा करने देते हैं.

8.

हर व्यक्ति कि आत्मा का एक हिस्सा कमज़ोर और ज़रूरतमंद होता है जिसे खरीदा जा सकता है. और ये भी सच है कि हर इंसान कि आत्मा का एक हिस्सा मज़बूत और दृढ-निश्चयी होता है जिसे कभी नहीं खरीदा जा सकता. असली सवाल ये है कि इनमे से कौनसा हिस्सा जायदा ताक़तवर है.

ज़्यादातर लोगों कि एक कीमत होती है और वो उनकी कीमत इसलिए होती है क्यूँकी हम सभी में दो भावनाएं होती हैं डर और लालच.

पहले वो पैसा के बिना रहने के डर से कड़ी मेहनत करते हैं और इसके बाद जब हमें तनख्वाह मिलती है तो हम में लालच या इच्छा कि भावना जाग जाती है.

पैसे होने पर हम उन बढ़िया बढ़िया चीज़ों के बारे में सोचने पे मजबूर हो जाते हैं जो उस पैसे से खरीदी जा सकती हैं. और इस तरह हमारी ज़िन्दगी का एक पैटर्न बन जाता है. सुबह उठो काम पर जाओ खर्च सुबह उठो काम पर जाओ खर्च करो.

लोगों कि ज़िन्दगी हमेशा डर और लालच इन्ही डॉ भावनाओं से चलती है. उन्हें अगर जायदा पैसा मिल भी जाए तो भी वो इसी पैटर्न पे चलकर अपना खर्च बढ़ा लेंगे. इसी पैटर्न को चूहा दौड़ कहा जाता है यानी RAT RACE कहा जाता है.

9.

अगर तुम्हे डर और लालच पे काबू पाना नहीं आता, तो तुम चाहे कितने भी अमीर बन जाओ असलियत में तुम एक बड़ी तनख्वाह पाने वाले गुलाम ही रहोगे.

ग़रीबी या पैसे की तंगी का ख़ास कारण डर और अज्ञान होता है ना की अर्थव्यवस्था या सरकार या अमीर लोग. ये खुद का ओढा हुआ डर और अज्ञान होता है जो लोगों को इस जाल में फंसाए रखता है.

10.

रिच डैड पुअर डैड के अब हम दसवें रोचक तथ्य के बारे में बात करेंगे.
धन असल में एक भरम है जो हक़ीकत में एक घधे के सामने लटकी गाजर कि तरह होता है. धन के भरम के कारण जो डर और लालच पैदा होता है उसकी वजह से ही अरबों खरबों लोग ये सोचते रहते हैं कि धन असली चीज़ है.

धन दरअसल में एक मायाजाल है. जनता के अज्ञान और भरोसे कि वजह से ही ताश के पत्तों का ये महल खड़ा रह पाता है.

अगर ऐसा ही चलता रहा तो गरीबों और अमीरों के बीच खाई एक दिन इतनी बड़ी हो जायेगी कि क़यामत आ जायेगी.

ग़रीब, मध्यमवर्गीय और नासमझ लोगों कि ज़िन्दगी सिर्फ इसलिए बर्बाद हो जायेगी क्यूँकि वे ये भरोसा करते हैं कि धन ही असली चीज़ है और वो जिस कंपनी के लिए काम करते हैं वो कंपनी या सरकार उनका ख्याल रखेगी.

11.

जितनी जल्दी तुम तनख्वाह कि ज़रुरत को भूल जाओगे, तुम्हारी आगे कि ज़िन्दगी उतनी ही आसान होती चली जायेगी. अपने दिमाग का इस्तेमाल करो. मुफ्त में काम करो और जल्द ही तुम्हारा दिमाग तुम्हे पैसे कमाने के दूसरे तरीक़े बता देगा.

उन तरीकों से तुम इस नौकरी से ज़्यादा पैसा कम लोगे. तुम ऐसी चीज़ें देख पाओगे जो दूसरे लोग कभी नहीं देख पाते. मौके उनकी नाक के नीचे होते हैं फिर भी ज़्यादातर लोग इन मौकों को कभी नहीं देख पाते.

इसका कारण ये है कि वो पैसे और सुरक्षा ढूंढते रहते हैं. जिस वक़्त तुम एक मौका भांपने में कामयाब हो जाओगे उसके बाद तुम ज़िन्दगी भर मौका भांप सकते हो.

12.

रिटायरमेंट का ये मतलब नहीं है कि हम काम नहीं करते या हम आगे काम नहीं करेंगे. इसका मतलब ये है कि जब तक हम चाहें तब तक हम काम करने या ना करने के लिए आज़ाद हैं.

और इसका कारण ये है कि हमारी दौलत अपने आप हध्ती रहती है. महँगाई से भी कहैं ज़्यादा तेज़ रफ़्तार से. और असल मायने में आज़ादी इसी को कहते हैं.

13.

बहुत से लोग सिर्फ पैसे पर अपना ध्यान लगाए बैठे हैं और अपनी सबसे बड़ी दौलत पर ध्यान नहीं दे रहे हैं. जिसका नाम है शिक्षा. अगर लोग लचीले होने, दिमाग खुला रखने, और सीखने के लिए तैयार राहें तो तमाम आर्थिक उतार चढ़ावों के बावजूद भी वो बहुत अमीर बन सकते हैं.

अगर लोग ये सोचेंगे कि पैसा ही उनकी समस्याओं को सुलझा सकता है तो ऐसे लोगों के लिए आगे आने वाला समय बहुत परेशानी भरा होगा.

समस्याएँ बुद्धि से सुलझती हैं और पैसा आता है. अगर आपके पास पैसा कि समझ नहीं है तो पैसा चाहे आ भी जाए पर ज़्यादा देर तक नहीं टिकता.
रिच डैड पुअर डैड के रोचक तथ्य आपको कैसे लग रहे हैं कृपया कमेंट में ज़रूर बताएँ.

14.

अमीर होने का सबसे पहला महत्वपूर्ण नियम ये है कि आपको संपत्ति और दायित्वों के बीच का अंतर पता होना चाहिए. और हमेशा संपत्ति ही खरीदना चाहिए.

अगर आप अमीर बनना चाहते हैं तो आपको बस इतना ही जानना ज़रूरी है. यही पहला नियम है. यही इकलौता नियम है.

ये बहुत आसान लगता है लेकिन ज़्यादातर लोगों को ये एहसास ही नहीं है कि ये नियम कितना महत्वपूर्ण है. ज़्यादातर लोग पिसे कि समस्याओं में सिर्फ इसलिए उलझे रहते हैं क्यूँकी उन्हें ये पता ही नहीं होता कि संपत्ति और दायित्व में क्या फ़र्क होता है.

अमीर लोग संपत्ति इकट्ठी करते हैं, और ग़रीब और मध्यमवर्गीय लोग दायित्व इकट्ठे करते हैं. और मज़े की बात ये है कि उन लोगों को ये लगता है कि वे संपत्ति इकट्ठी कर रहे हैं.

15.

संपत्ति वो चीज़ है जो आपकी जेब में पैसा डालती है. दायित्व वो चीज़ है जो आपकी जेब से पैसा निकलती है. अगर आप अमीर बनना चाहते हैं तो ज़िन्दगी भर संपत्ति खरीदते रहिये.

अगर ग़रीब या मध्यमवर्गीय बनना चाहते हैं तो आप ज़िन्दगी भर दायित्व खरीदते रहिये.

पैसे की तंगी का कारण सिर्फ यही है कि लोग इनके बीच के फ़र्क को नहीं जानते हैं. तो अगर आप अमीर बनना चाहते हैं और अपनी दौलत को बनाए रखना चाहते हैं तो पैसे कि साक्षरता और समझदारी महत्वपूर्ण है.

16.

आज व्यावसायिक सफलता का शैक्षणिक सफलता के साथ कोई सीधा सम्बन्ध नहीं रह गया है.जब विद्यार्थियों में स्कूल छोड़ते समय पैसे की कोई समझ नहीं होती है तब करोड़ों पढ़े लिखे लोग अपने कारोबार में तो सफल हो जाते हैं लेकिन बाद में वो पैसे कि तंगी से जूझते रहते हैं.

उनकी शिक्षा में कमी ये नहीं है कि उन्हें पैसे कमाना नहीं सिखाया गया है बल्कि ये है कि उन्हें पैसे खर्च करने का तरीक़ा नहीं सिखाया गया है.

17.

लोगों कि ज़िन्दगी में पैसे कि तंगी इसलिए आती है क्यूँकी वो अपनी सारी ज़िन्दगी दोसरों के लिए कार्य करते रहते हैं. कई लोगों के पास तो ज़िन्दगी भर काम करने के बाद भी अपने लिए कुछ नहीं बच पाता.

18.

पैसे के बारे में सबसे अच्छी चीज़ ये है कि ये हर दिन 24 घंटे काम करता है और ऐसा पीढ़ियों तक कर सकता है. आप जो भी काम करते हैं उसे करते रहें परन्तु साथ ही साथ अपने संपत्ति वाले कॉलम को बढाते रहें.

जब आपका कैशफ्लो बढ़ता है तब आप कुछ विलासिता वाली चीज़ें ख़रीद सकते हैं. इस बारे में एक महत्वपूर्ण तथ्य ये है कि अमीर लोग विलासिता कि चीज़ें सबसे बाद में खरीदते हैं जबकि ग़रीब और मध्यमवर्गीय लोग विलासिता कि चीज़ें सबसे पहले खरीदते हैं.

लोग अक्सर बड़े घर, हीरे, ज्वेलरी, गाडी ऐसी विलासिता वाली चीज़ें इसलिए ख़रीद लेते हैं ताकि वे अमीर दिख सकें और वे दिखते भी हैं परन्तु असल में वो उधार के दलदल में गहरे धंसते चले जाते हैं.

19.

हम में बहुत ज़्यादा संभावनाएं होती हैं और हमें प्रकृति से बहुत से उपहार दिए होने हैं. परन्तु जो चीज़ हम सभी को पीछे धकेलती है वो है खुद के बारे में शंका. तकनीकी जानकारी कि कमी के कारण हम पीछे नहीं रहते बल्कि आत्मविश्वास कि कमी के कारण पीछे रहते हैं.

कॉलेज डिग्री के होने या अच्छे नम्बरों के होने का कोई ख़ास महत्व नहीं होता. शैक्षणिक माहोल के बाहर असली ज़िन्दगी में अच्छे नम्बरों से ज़्यादा महत्वपूर्ण चीज़ की ज़रुरत होती है. इसे गट्स, बहादुरी, चालाकी, साहस, प्रतिभा, जोखिम लेने कि क्षमता इत्यादि के नाम से पुकारा जाता है.

ये तत्त्व, चाहे इसे किसी भी नाम से पुकारा जाए कुल मिला कर हमारे भविष्य पर स्कूल के नम्बरों से ज़्यादा असर डालता है.

20.

व्यक्ति की प्रतिभा के सबसे बड़े दुश्मन हैं बहुत ज़्यादा डर और खुद कि क्षमताओं के बारे में शंका. असली ज़िन्दगी में इंटेलीजेंट लोग उतना आगे नहीं बढ़ पाते जितना बहादुर लोग आगे बढ़ पाते हैं.

21.

बहुत कम लोग ये समझ पाते हैं कि किस्मत भी हम ही बनाते हैं जिस तरह कि पैसा बनाया जाता है. अगर आप ज़्यादा किस्मतवाले होना चाहते हैं और ज़्यादा पैसा हनाना चाहते हैं तो कड़ी मेहनत करने के अलावा आपकी फाइनेंसियल बुद्धि महत्वपूर्ण है.

अगर आप उस तरह के व्यक्ति हैं जो सही चीज़ के होने का इंतज़ार करता है तो शायद आपको बहुत लम्बे समय तक इंतज़ार करना पड़ेगा.

22.

फाइनेंसियल बुद्धि चार मुख्या तकनीकी दक्षताओं से मिलकर बनती है.

1. वित्तीय साक्षरता यानी अंको को पढने की योग्यता.
2. निवेश कि रणनीति यानी धन द्वारा धन बनाने का विज्ञान.
3. बाज़ार यानी मांग और पूर्ती की समझ.
4. कानून-राष्ट्रीय कानूनों के बारे में जागरूकता. यानी नियमो के भीतर रहकर खेलना.

यदि आप पैसे का अविष्कार करना चाहते हैं तो आपमें ये मूलभूत आदार्शिला होनी चाहिए यानी इन दक्षताओं का समन्वय होना चाहिए.

23.

आप जो जानते हैं वही आपकी सबसे बड़ी पूँजी है. आप जो नहीं जानते हैं वही आपका सबसे बड़ा जोखिम है. जोखिम तो हमेशा रहता है. इसलिए इससे बचने के बजाय इसे मैनेज करना सीखें.

24.

स्कूल और नौकरी में विशेषज्ञता का विचार एक लोकप्रिय विचार है. यानी कि ज़्यादा धन कमाने के लिए या प्रमोशन हासिल करने के लिए आपको विशेषज्ञता हासिल करने की ज़रुरत है.

इसीलिए मेडिकल डॉक्टर्स तत्काल आपने देखा होगा बाल रोग विशेषज्ञ या अस्थि रोग विशेषज्ञ जैसी विशेषज्ञता हासिल करने में जुट जाते हैं. और यही बात एकाउंटेंट्स, आर्किटेक्टस, वकीलों, पायलट, और बाकी लोगों के बारे में भी सही है.

पढ़े लिखे डैडी इसी विचारधारा में यकीन रखते थे. इसीलिए वे डॉक्टरेट मिलने के बाद रोमांचित हो गए थे.

वे ये मानते थे कि स्कूल में ऐसे लोगों का सम्मान किया जाता है जो कम से कम चीज़ों के बारे में ज़्यादा से जायदा पढ़ते हैं.

लेकिन अमीर डैडी इसका उल्टा करने के लिए प्रोत्साहित करते थे. आपको हर चीज़ के बारे में थोडा थोडा पता होना चाहिए. ये उनका सुझाव था.

25.

एक और डरावनी मैनेजमेंट थ्योरी है काम करने वाले इसलिए कड़ी मेहनत करते हैं ताकि उन्हें नौकरी से ना निकाला जाए और मालिक उन्हें केवल इतना देते हैं ताकि काम करने वाले छोड़कर ना चले जाएँ.

और अगर आप ज़्यादातर कंपनियों की तनख्वाहें देखें तो आप पायेंगे कि इस बात में थोड़ी बहुत सच्चाई तो है.

रिच डैड पुअर डैड के 25 रोचक तथ्य आपको कैसे लगे लगे, कृपया कमेंट में बताएँ, इस लेख में मैंने आपको कुछ सिखाने की कोशिश की है. आप इस साइट पर बने रहें आते रहें, देखते रहें, कुछ ना कुछ आपको नया सीखने को मिलता रहेगा अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो अपने दोस्तों के साथ में शेयर करना ना भूले.

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